検非違使に問われたる媼の物語
जी हाँ, वह शव मेरी बेटी का पति है। पर वह राजधानी का रहने वाला नहीं था। वह वाकासा प्रांत के राज्य-कार्यालय का समुराई था। उसका नाम कानज़ावा का ताकेहीरो था, और उम्र छब्बीस वर्ष की थी। नहीं, वह नम्र स्वभाव का मनुष्य था, इसलिए उस पर किसी को द्वेष नहीं हो सकता था।
बेटी के बारे में पूछते हैं? उसका नाम मसागो है, उम्र उन्नीस वर्ष की है। वह स्त्री होकर भी पुरुषों से कम नहीं, बड़ी स्वाभिमानी स्त्री थी। पर ताकेहीरो के अलावा उसने कभी किसी पुरुष को अपना नहीं बनाया। उसका रंग कुछ साँवला था, बायीं आँख के किनारे पर काला तिल था, और चेहरा छोटा-सा अंडाकार था।
ताकेहीरो कल मेरी बेटी के साथ वाकासा जाने के लिए रवाना हुआ था। पर उसके साथ यही बीतेगी, यह कैसा प्रारब्ध है! मगर मेरी बेटी का क्या हुआ? दामाद के विषय में भले ही मन से क्षमा कर दूँ, पर उसकी चिन्ता मुझे बराबर सताती है। इस बुढ़िया का आजीवन निवेदन है कि चाहे जंगल-झाड़ ही छानने पड़ें, कृपया मेरी बेटी का पता लगाइए। बहरहाल, सबसे घृणित उस चोर की कारस्तानी है, जो अपना नाम ताजोमारू या कुछ-कुछ कहता है। उसी ने दामाद ही नहीं, बेटी का भी......
(इसके बाद वह रोने लगी और उसके मुँह से शब्द नहीं निकले।)
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